bas isee soch men zindagi kat gaii | बस इसी सोच में ज़िंदगी कट गई

  - Ankit Yadav
बसइसीसोचमेंज़िंदगीकटगई
वोलौटाकभीबेख़ुदीकटगई
जिस्मऔरजानदोनोंकीसरहदसेदूर
वोगयातोमिरीहरख़ुशीकटगई
उसकेरस्तोंपेपलकेंबिछाएहुए
मेरीआँखोंकीसारीनमीकटगई
रौशनीमुझसेेनज़रेंचुरानेलगी
बिजलियाँभीमिरेशहरकीकटगई
दूसरीमैंदु'आऔरक्यामाँगता
जबदु'आहीमिरीआख़िरीकटगई
  - Ankit Yadav
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