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Ankit Yadav
ai sakhi be-tahaasha mohabbat tiri mujhko har rasm se maavra thii magar
ai sakhi be-tahaasha mohabbat tiri mujhko har rasm se maavra thii magar | ऐ सखी बे-तहाशा मोहब्बत तिरी मुझको हर रस्म से मावरा थी मगर
- Ankit Yadav
ऐ
सखी
बे-तहाशा
मोहब्बत
तिरी
मुझको
हर
रस्म
से
मावरा
थी
मगर
उम्र
तन्हा
बिताने
से
अच्छा
ये
था
तुम
सफ़र
में
कोई
हम-सफ़र
देखते
ना-मुकम्मल
सभी
ख़्वाब
हैं
आज
तक
फिर
भी
बस
एक
दिल
की
ख़ुशी
के
लिए
चश्म-ए-हैराँ
से
बुनते
किसी
ख़्वाब
को
फिर
उसी
ख़्वाब
को
रात
भर
देखते
- Ankit Yadav
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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ठंडी
चाय
की
प्याली
पी
के
रात
की
प्यास
बुझाई
है
Rais Farog
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एक
ही
शख़्स
नहीं
होता
सदा
दिल
का
सुकूँ
एक
करवट
पे
कभी
नींद
नहीं
आ
सकती
Rehan Mirza
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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कहाँ
है
तू
कि
तिरे
इंतिज़ार
में
ऐ
दोस्त
तमाम
रात
सुलगते
हैं
दिल
के
वीराने
Nasir Kazmi
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किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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ख़्वाबों
को
आँखों
से
मिन्हा
करती
है
नींद
हमेशा
मुझ
सेे
धोखा
करती
है
उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वग़ैरा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
AMAN RAJ SINHA
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हर
एक
रात
को
महताब
देखने
के
लिए
मैं
जागता
हूँ
तिरा
ख़्वाब
देखने
के
लिए
Azhar Inayati
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उसके
पहलू
में
रात
होती
है
बात
करने
पे
बात
होती
है
वैसे
टाइम
का
कुछ
पता
तो
नहीं
हाँ
मगर
पौने
सात
होती
है
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Ankit Yadav
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इस
तरह
झूम
के
तू
चलता
है
जिस
तरह
कोई
माफ़िया
जाए
Ankit Yadav
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अजीब
ज़िद
सी
पकड़
कर
गुलाल
बैठ
गए
वो
जब
छुपा
के
हथेली
से
गाल
बैठ
गए
Ankit Yadav
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सिर्फ़
दिल
ही
नहीं
जले
हैं
यहाँ
रोज़
जलती
हैं
सिगरटें
कितनी
बस
यही
देखना
है
तेरे
बाद
दिल
में
बचती
हैं
औरतें
कितनी
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Ankit Yadav
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नाम
से
एतिराज़
है
शायद
नाम
लिख
कर
मिटा
दिया
जाए
Ankit Yadav
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