jo zaKHm ab haraa nahin bhara nahin | जो ज़ख़्म अब हरा नहीं भरा नहीं

  - Ankit Yadav
जोज़ख़्मअबहरानहींभरानहीं
कभीज़रासादर्दहैज़रानहीं
मेरेक़रीबसिर्फ़तुमथीऔरमुझे
तुम्हींतोचाहिएथीअप्सरानहीं
कोईफोनकोईख़तराब्ता
ख़ुदाकाशुक्रदोस्ततूमरानहीं
हैदौर-ए-इश्क़औरशिकारचाहिए
तोअबकिसीसेकोईमशवरानहीं
तूकोईऔररास्तातलाशकर
मैंउनकसौटियोंपेअबखरानहीं
तोक्यामैंउम्रभररहूँगामुस्तकिल
तोउसनज़रकोकोईआसरानहीं
  - Ankit Yadav
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