ai abr-e-iltifaat tira e'tibaar phir | ऐ अब्र-ए-इल्तिफ़ात तिरा ए'तिबार फिर

  - Akram Naqqash
अब्र-ए-इल्तिफ़ाततिराए'तिबारफिर
आँखोंमेंफिरवोप्यासवहीइंतिज़ारफिर
रख्खूँकहाँपेपाँवबढ़ाऊँकिधरक़दम
रख़्श-ए-ख़यालआजहैबे-इख़्तियारफिर
दस्त-ए-जुनूँ-ओ-पंजा-ए-वहशतचिहार-सम्त
बे-बर्ग-ओ-बारहोनेलगीहैबहारफिर
पस्पाइयोंनेगाड़दिएदाँतपुश्तपर
यूँँदामन-ए-ग़ुरूरहुआतारतारफिर
निश्तरतिरीज़बाँहीनहींख़ामुशीभीहै
कुछरह-गुज़ार-ए-रब्तहुईख़ार-ज़ारफिर
मुझमेंकोईसवालतिरेमा-सिवानहीं
मुझमेंयहीसवालहुआएकबारफिर
  - Akram Naqqash
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