yuñ hi rakhhoge imtihaan men kya | यूँँ ही रक्खोगे इम्तिहाँ में क्या

  - Akram Mahmud
यूँँहीरक्खोगेइम्तिहाँमेंक्या
नहींआएगीजानजाँमेंक्या
क्यूँँसदाकानहींजवाबआता
कोईरहतानहींमकाँमेंक्या
इकज़मानाहैरू-ब-रूमेरे
तुमआओगेदरमियाँमेंक्या
वोजोक़िस्सेदिलोंकेअंदरहैं
वोभीलाओगेदरमियाँमेंक्या
किसक़दरतल्ख़ियाँहैंलहजेमें
ज़हरबोतेहोतुमज़बाँमेंक्या
दिलकोशिकवानहींकोईतुमसे
हमनेरहनानहींजहाँमेंक्या
वोजोइकलफ़्ज़ए'तिबारकाथा
अबनहींहैवोदरमियाँमेंक्या
मेरेख़्वाबोंकेजोपरिंदेथे
हैंअभीतकतिरीअमाँमेंक्या
अबतोयेभीनहींख़यालआता
छोड़आएथेइसजहाँमेंक्या
येबखेड़ाजोज़िंदगीकाहै
छोड़दूँउसकोदरमियाँमेंक्या
चंदवा'देथेचंददा'वेथे
औररखाथादास्ताँमेंक्या
जानेवोदिलथायादियाकोई
रातजलताथाशम्अ-दाँमेंक्या
  - Akram Mahmud
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