koi hunar to mirii chashm-e-ashk-baar men hai | कोई हुनर तो मिरी चश्म-ए-अश्क-बार में है

  - Akram Mahmud
कोईहुनरतोमिरीचश्म-ए-अश्क-बारमेंहै
किआजभीवोकिसीख़्वाबकेख़ुमारमेंहै
किसीबहारकामंज़रहैचश्म-ए-वीराँमें
किसीगुलाबकीख़ुशबूदिल-ए-फ़िगारमेंहै
अजबतक़ाज़ाहैमुझसेजुदाहोनेका
किजैसेकौन-ओ-मकाँमेरेइख़्तियारमेंहै
निशान-ए-राहभीठहरेगाबारिशोंकेबा'द
अभीयेनक़्शकिसीराहकेग़ुबारमेंहै
उफ़ुक़केअक्सकिसीआइनेमेंक्यासिमटीं
किशौक़-ए-जल्वाअभीअपनेइंतिशारमेंहै
मकाँकीकोईख़बरला-मकाँकोकैसेहो
सफ़ीर-ए-रूहअभीजिस्मकेहिसारमेंहै
कमाल-ए-ज़ब्तकीसाअ'तकहींगुज़रभीजा
सितारा-ए-शब-ए-ग़ममेरेइंतिज़ारमेंहै
  - Akram Mahmud
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