KHaak se KHvaab talak ek si veeraani hai | ख़ाक से ख़्वाब तलक एक सी वीरानी है

  - Akram Mahmud
ख़ाकसेख़्वाबतलकएकसीवीरानीहै
मेरेअंदरमिरेबाहरकीबयाबानीहै
कोईमंज़रकहींमौजूदहैपस-मंज़रमें
वर्नाक्याचीज़हैजोबाइ'स-ए-हैरानीहै
कहकेदेखेंगेब-हर-तौरमगरपहलेभी
दिल-ए-ख़ुद-सरनेकोईबातकहाँमानीहै
किसेमालूमहैरुकनाकिगुज़रजानाहै
शामहैठहरीहुईबहताहुआपानीहै
देखयेदिलजोकभीहदसेगुज़रजाताथा
देखदरियामेंकोईशोरतुग़्यानीहै
  - Akram Mahmud
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