nikal raha hooñ yaqeen ki had se gumaan ki jaanib | निकल रहा हूँ यक़ीं की हद से गुमाँ की जानिब

  - Akram Mahmud
निकलरहाहूँयक़ींकीहदसेगुमाँकीजानिब
सफ़रहैमेराज़मीनसेआसमाँकीजानिब
मुंडेरपरकोईचश्म-ए-तरथीकिआइनाथा
सितारा-ए-शामदेखताथामकाँकीजानिब
येख़्वाबहैयातिलिस्मकोईकिख़ुश्कपत्ते
खिंचेचलेजारहेहैंआब-ए-रवाँकीजानिब
कोईतोऊपरसेबोझडालागयाहैवर्ना
झुकाहुआआसमाँहैक्यूँँख़ाक-दाँकीजानिब
तोफिरमिरेसाथउसकाचलनामुहालठहरा
ध्यानरहताथाउसकासूद-ओ-ज़ियाँकीजानिब
सुकूनत-ए-क़ल्बख़ालीसीनेपेऐसेउतरी
अमाँख़ुदीचलकेगईबे-अमाँकीजानिब
  - Akram Mahmud
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