mila jo koi yahaañ ramz-aashna na mujhe | मिला जो कोई यहाँ रम्ज़-आशना न मुझे

  - Akhtar Ziai
मिलाजोकोईयहाँरम्ज़-आशनामुझे
वबाल-ए-होशरहाहर्फ़-ए-महरमानामुझे
उदासफिरतीहैशादाबवादियोंकीमहक
हैकाएनातयहीकुंज-ए-आशियानामुझे
अदूकीसंग-ज़नीकीनहींमुझेपरवा
तिरेकरमकामुयस्सरहैशामियानामुझे
कोईइलाज-ए-ग़म-ए-ज़िंदगीबतावाइज़
सुनेहुएजोफ़सानेहैंफिरसुनामुझे
सुबुक-सरीमेंज़मीन-ए-वतनभीतंगहुई
कशाँकशाँलिएफिरताहैआब-ओ-दानामुझे
मिरेनसीबमेंहैकिश्त-ए-जाँकीवीरानी
आईरासरह-ओ-रस्म-ए-आशिक़ानामुझे
भटकरहाहूँउसीकीतलाशमें'अख़्तर'
किजिसदयारकोछोड़ेहुआज़मानामुझे
  - Akhtar Ziai
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy