hum-nasheen raat hai to raat bhi dhal jaayegi | हम-नशीं रात है तो रात भी ढल जाएगी

  - Akhtar Ziai
हम-नशींरातहैतोरातभीढलजाएगी
सुब्ह-दमसूरत-ए-हालातबदलजाएगी
हिद्दत-ए-शौक़सलामतहैतोज़ंजीर-ए-जफ़ा
सूरत-ए-शम्अ'किसीरोज़पिघलजाएगी
उनकादमभरतेहोतोग़मकरोआख़िर-कार
उनपेदमदेनेकीहसरतभीनिकलजाएगी
हम-सफ़ीरोकभीमिटतीहैतमन्ना-ए-बहार
येकिसीफूलकिसीशो'लेमेंढलजाएगी
यहीबेहतरहैकिक़ुर्बान-ए-वफ़ाहोजाए
जाँअगरआजजाएगीतोकलजाएगी
किसकोमालूमथामल्बूस-ए-सबामेंसरसर
केगुलशनमेंशगूफ़ोंकोमसलजाएगी
अबकेसावनभीअगरअब्रबरसा'अख़्तर'
जोकलीशाख़पेनिकलेगीवोजलजाएगी
  - Akhtar Ziai
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