gham-e-zamaana nahin ik azaab hai saaqi | ग़म-ए-ज़माना नहीं इक अज़ाब है साक़ी

  - Akhtar Shirani
ग़म-ए-ज़मानानहींइकअज़ाबहैसाक़ी
शराबलामिरीहालतख़राबहैसाक़ी
शबाबकेलिएतौबाअज़ाबहैसाक़ी
शराबलामुझेपास-ए-शबाबहैसाक़ी
उठापियालाकिगुलशनपेफिरबरसनेलगी
वोमयकिजिसकाक़दहमाहताबहैसाक़ी
निकालपर्दा-ए-मीनासेदुख़्तर-ए-रज़को
घटामेंकिसलिएयेमाहताबहैसाक़ी
तूवाइ'ज़ोंकीसुनमय-कशोंकीख़िदमतकर
गुनहसवाबकीख़ातिरसवाबहैसाक़ी
ज़माने-भरकेग़मोंकोहैदावत-ए-ग़र्रा
किएकजाममेंसबकाजवाबहैसाक़ी
कलामजिसकाहैमेराज'हाफ़िज़'-ओ-'ख़य्याम'
यहीवो'अख़्तर'-ए-ख़ाना-ख़राबहैसाक़ी
  - Akhtar Shirani
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