bujha sa rehta hai dil jab se hain watan se juda | बुझा सा रहता है दिल जब से हैं वतन से जुदा

  - Akhtar Shirani
बुझासारहताहैदिलजबसेहैंवतनसेजुदा
वोसेहन-ए-बाग़नहींसैर-ए-माहताबनहीं
बसेहुएहैंनिगाहोंमेंवोहसींकूचे
हरएकज़र्राजहाँकमज़े-आफ़्ताबनहीं
वोबाग़-ओ-राग़केदिलचस्प-ओ-दिल-नशींमंज़र
किजिनकेहोतेहुएख़ुल्दमिस्ल-ए-ख़्वाबनहीं
वोजूएबार-ए-रवाँकातरब-फ़ज़ापानी
शराबसेनहींकुछकमअगरशराबनहीं
ब-रंग-ए-ज़ुल्फ़परेशाँवोमौज-हा-ए-रवाँ
किजिनकीयादमेंरातोंकोफ़िक्र-ए-ख़्वाबनहीं
समारहेहैंनज़रमेंवोमहव-शान-ए-हरम
हरममेंजिनकेसितारेभीबारयाबनहीं
वतनकाछेड़दियाकिसनेतज़्किरा'अख़्तर'
किचश्म-ए-शौक़कोफिरआरज़ू-ए-ख़्वाबनहीं
  - Akhtar Shirani
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