bahaar aayi hai mastaana ghatta kuchh aur kahti hai | बहार आई है मस्ताना घटा कुछ और कहती है

  - Akhtar Shirani
बहारआईहैमस्तानाघटाकुछऔरकहतीहै
मगरउनशोख़नज़रोंकीहयाकुछऔरकहतीहै
रिहाईकीख़बरकिसनेउड़ाईसेहन-ए-गुलशनमें
असीरान-ए-क़फ़ससेतोसबाकुछऔरकहतीहै
बहुतख़ुशहैदिल-ए-नादाँहवा-ए-कू-ए-जानाँमें
मगरहमसेज़मानेकीहवाकुछऔरकहतीहै
तूमेरेदिलकीसुनआग़ोशबनकरकहरहाहैकुछ
तिरीनीचीनज़रतोजानेक्याकुछऔरकहतीहै
मिरीजानिबसेकहदेनासबालाहौरवालोंसे
किइसमौसममेंदेहलीकीहवाकुछऔरकहतीहै
हुईमुद्दतकेमय-नोशीसेतौबाकरचुके'अख़्तर'
मगरदेहलीकीमस्तानाफ़ज़ाकुछऔरकहतीहै
  - Akhtar Shirani
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