shuoor-e-gham ki tanhaaii se jal-thal ho chuki hai | शुऊर-ए-ग़म की तन्हाई से जल-थल हो चुकी है

  - Akhtar Shaikh
शुऊर-ए-ग़मकीतन्हाईसेजल-थलहोचुकीहै
मैंकोईज़िंदगीथाजोमोअ'त्तलहोचुकीहै
कोईइमदादकापहलूनिकलआनेसेपहले
जोमुश्किलथीहमारेसामनेहलहोचुकीहै
सहरकाजिस्मक्यूँतकतेनहींहैंबस्तीवाले
शब-ए-उफ़्तादतोआँखोंसेओझलहोचुकीहै
अबदिखलाओउनसेमिलता-जुलताकोईचेहरा
मिरेअंदरकीदुनियाकबकीपागलहोचुकीहै
हुईनज़दीकमंज़िलतोनहींचलनेकायारा
बदनकमज़ोरहैयाखालबोझलहोचुकीहै
हमारेसरसेअब्र-ए-आफ़ियतगुज़रेतोजानें
हवारफ़्तारमेंकितनीमुसलसलहोचुकीहै
फ़सीलेंसामराजीतौक़पहनेरोरहीहैं
कहानीशाहज़ादोंकीमुकम्मलहोचुकीहै
  - Akhtar Shaikh
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