shola hooñ phir bhi barf ke ik pairhan men hooñ | शो'ला हूँ फिर भी बर्फ़ के इक पैरहन में हूँ

  - Akhtar Shaikh
शो'लाहूँफिरभीबर्फ़केइकपैरहनमेंहूँ
महसूसहोरहाहैकिज़िंदाकफ़नमेंहूँ
अबजाहिलोंसीबातभीकरनामुहालहै
काटीहुईज़बानकीसूरतदहनमेंहूँ
क्यामरहलाहैअह्द-ए-सफ़रसेसफ़रतलक
पाँवरुकेहुएहैंमुसलसलथकनमेंहूँ
चाहतकेहरमुहीतसेबाहरहैंवलवले
हिजरतकरेहैसोचमगरख़ुदवतनमेंहूँ
फैलाहुआहूँधूपकीसूरतनगरनगर
'अख़्तर'मैंबू-ए-गुलकीतरहहरचमनमेंहूँ
  - Akhtar Shaikh
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