pahaad se koi raah utre to main bhi dekhooñ | पहाड़ से कोई राह उतरे तो मैं भी देखूँ

  - Akhtar Shaikh
पहाड़सेकोईराहउतरेतोमैंभीदेखूँ
बुलंदियोंसेनिगाहउतरेतोमैंभीदेखूँ
गुनाह-कर्दाबदनहैउसकातोतुमभीदेखो
सलीबसेबे-गुनाहउतरेतोमैंभीदेखूँ
सहेहैंबस्तीनेमौसमोंकेअज़ाबक्याक्या
छतोंसेआब-ओ-गियाहउतरेतोमैंभीदेखूँ
यहाँकिसेरासआईहैरस्म-ए-ख़ुद-नुमाई
सरोंसेज़ौक़-ए-कुलाहउतरेतोमैंभीदेखूँ
कहाँकहाँजिस्मधूपसेहोगएहैंजल-थल
नगरमेंशाम-ए-सियाहउतरेतोमैंभीदेखूँ
  - Akhtar Shaikh
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