iraadon ka badan koi bhi paainda nahin rakhta | इरादों का बदन कोई भी पाइंदा नहीं रखता

  - Akhtar Shaikh
इरादोंकाबदनकोईभीपाइंदानहींरखता
मिराइस्म-ए-मुकब्बिरहीमुझेज़िंदानहींरखता
अबउसकीहाकिमिय्यतचंदपहरोंतकसिमटआई
वोऐसेहालमेंभीफ़िक्र-ए-आइंदानहींरखता
चलाआताहूँमैंइल्ज़ामसेपहलेकटहरेमें
अदालतमेंअनाकीख़ुदकोशर्मिंदानहींरखता
सभीलहजोंनेदर्स-ए-आफ़ियततोयादरक्खाहै
मुसावीसोचलेकिनकोईबाशिंदानहींरखता
मैंऐसेसर-फिरेलोगोंमेंबस्ताहूँजहाँ'अख़्तर'
क़बीलाख़त्महोजाएनुमाइंदानहींरखता
  - Akhtar Shaikh
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