KHud se kitna kiya daga main ne | ख़ुद से कितना किया दग़ा मैं ने

  - Akhtar Saeed
ख़ुदसेकितनाकियादग़ामैंने
अभीसीखीनहींवफ़ामैंने
निकलाचूहापहाड़कोखोदा
जोकियाजोकहासुनामैंने
खोलिएक्यूँँदुखोंकेदफ़्तरको
सोचनाबंदकरदियामैंने
हाँलगायाहैज़िक्रअज़्मतपर
ज़ोरसेएकक़हक़हामैंने
हासिल-ए-ज़ीस्तहैकिदेखाहै
सुम्बुल-ओ-सब्ज़ा-ओ-सबामैंने
ज़िंदगीज़हरथाउसेसुक़रात
जुरआ'जुरआ'मगरपियामैंने
छुपकेबैठाहूँशर्मसारीसे
का'बेसेदूरलीहैजामैंने
येतोतज़लीलहैशहादतकी
कभीमाँगाख़ूँ-बहामैंने
जबबढ़ीऔरशर्म-ए-उर्यानी
ओढ़लीख़ाककीक़बामैंने
अपनेदिलकोतोसीनहींसकता
अपनेहोंटोंकोसीलियामैंने
ख़ौफ़सेभागनिकलामज्लिससे
जबसुनाज़िक्र-ए-कर्बलामैंने
  - Akhtar Saeed
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