dard ik roz koi rang dikh | दर्द इक रोज़ कोई रंग दिखाए तो बने

  - Akhtar Saeed
दर्दइकरोज़कोईरंगदिखाएतोबने
रूहगरछोड़केतनदहरमेंआएतोबने
नज़रआएँतिरेचेहरेकेख़द-ओ-ख़ालतमाम
दिलसेउठजाएँकभीवहमकेसाएतोबने
वहदत-ए-दर्दहोक़रियोंमेंहवाकीमानिंद
एकहोजाएँअगरअपनेपराएतोबने
वाइज़ाँमुज़्दाकिजन्नतमेंबहारआईहै
मेरीदुनियासेख़िज़ाँलौटकेजाएतोबने
देव-ए-तक़दीरखड़ाहैमेरेआगेहरदम
कोईतदबीरइसेज़हरपिलाएतोबने
जिसकोदेखाकिसीमुर्देकामुक़ल्लिददेखा
अपनीहोजाएहरइकशख़्सकीरायतोबने
सबकेदुखसुनताहूँमैंज़ोफ़-ए-ज़ईफ़ीमेंवले
मेरादुखकोईमिरीमाँकोसुनाएतोबने
अपनेआ'मालकोऔरोंसेछुपारक्खाहै
मेरीनिय्यतकोकोईमुझसेछुपाएतोबने
मैंबनातातोबहुतहूँनहींबनतीलेकिन
वोइनायतसेमिरीबातबनाएतोबने
  - Akhtar Saeed
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