har ghadi fikr-e-raasti kya hai | हर घड़ी फ़िक्र-ए-रास्ती क्या है

  - Akhtar Saeed
हरघड़ीफ़िक्र-ए-रास्तीक्याहै
इकमुसीबतहैज़िंदगीक्याहै
घुपअँधेराहैमेरेचारों-ओर
इसमेंथोड़ीसीरौशनीक्याहै
बहुतउलझाहुआहिसाबहैये
मेराखाताहैक्याबहीक्याहै
नामहैंनफ़्सकीपरस्तिशके
दोस्तीक्याहैदुश्मनीक्याहै
शहरमेंरहकेदेखिएइकदिन
दूरजंगलमेंराहेबीक्याहै
सारीबातोंकामैंमुसन्निफ़हूँ
मेरेआगेलिखीसुनीक्याहै
मैंनेदेखाहैख़ूँकीशम्ओं'से
गुम-रहीक्याहैरह-रवीक्याहै
अहद-ए-पीरीमेंअपनीलौह-ए-ज़मीर
साफ़होगरतोख़ुसरवीक्याहै
येतज़ादातयेसराबयेदिल
ज़िंदगीक्याहैआदमीक्याहै
बंदअश्कालमेंमुक़य्यदहूँ
अक़्लकिसकामआगहीक्याहै
सोचताहूँतोकुछनहींखुलता
जानताहूँमगरबदीक्याहै
दिलमेंवसवासया-अलीक्यूँँहै
सर-ए-महजूबया-नबीक्याहै
  - Akhtar Saeed
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