dil se armaan nikal rahe hain | दिल से अरमाँ निकल रहे हैं

  - Akhtar Saeed
दिलसेअरमाँनिकलरहेहैं
मेरेभीदिनबदलरहेहैं
वर्नाघरमेंहैघुपअँधेरा
यादोंकेचराग़जलरहेहैं
येअजबलोगहैंकिउनके
पाँवनहींपेचलरहेहैं
हमदर-ए-शाहपरसवाली
आजहैंऔरकलरहेहैं
वोहीपहुँचेंगेयारतकजो
गिरतेगिरतेसँभलरहेहैं
हमनिकोनामतोहुएपर
दिलपेआरेसेचलरहेहैं
उनकोआज़ादकरजोअबतक
ज़ेर-ए-हब्स-ए-इललरहेहैं
उनकोमहबूसकरजोकबसे
क़ाएदेसबकुचलरहेहैं
कहकर्ब-ओ-बलाकाक़िस्सा
लफ़्ज़ोंकेदिलदहलरहेहैं
  - Akhtar Saeed
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