ishq ka shor karen koi talabgaar to ho | इश्क़ का शोर करें कोई तलबगार तो हो

  - Akhtar Saeed
इश्क़काशोरकरेंकोईतलबगारतोहो
जिंसबाज़ारमेंलेजाएँख़रीदारतोहो
हिज्रकेसोख़्ता-जाँऔरजलेंगेकितने
तूरपरबैठेहैंकबसेतिरादीदारतोहो
शिद्दत-ए-दर्ददो-पलकेलिएकमहोताकि
ग़मकेअल्फ़ाज़केसिंगारमेंइज़हारतोहो
कबसेउम्मीदलगाएहुएबैठेहैंहम
नेसहीगरनहींइक़रारसोइंकारतोहो
कुफ़्रएहरामकेपर्देमेंछुपादेखाहै
एकआलमहैअगरदरपयज़ुन्नारतोहो
हमनेमानाकिशराफ़तहैबड़ीचीज़मगर
कुछज़मानेकोशराफ़तसेसरोकारतोहो
ख़ाना-ए-दिलमेंनहींएककिरनकाभीगुज़र
सारीदुनियाहैअगरमतला-ए-अनवारतोहो
राज़दारीहीमेंहोताहैशरीफ़ोंकाहिसाब
तुझकोमंज़ूरहैगरबर-सर-ए-बाज़ारतोहो
  - Akhtar Saeed
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