फिरसबागुज़रीहैदर-ए-सेहन-ए-चमनक्याकहना
अबतलककाँपतेहैंसर्व-ओ-समनक्याकहना
ज़र्रा-ए-ख़ाकहूँमैंसैल-ए-हवादिसकेलिए
औरइसज़र्रेमेंदिलशाह-ए-ज़मनक्याकहना
जिस्मकेहुक्मसेआज़ादहोजाँचाहाथा
रूहकेहुक्मसेआज़ादहैतनक्याकहना
शहरवीरानहुआगोर-ए-ग़रीबाँकीतरह
उसपेमैंऔरमिरीरंगीनी-ए-फ़नक्याकहना
हैगराँतब-ए-शहीदाँपेमज़ार-ओ-मर्क़द
जिस्मख़ूँ-बस्ताहैख़ुदउनकाकफ़नक्याकहना
लेकयेभीतोखुलेकुछतिरीनिय्यतक्याहै
नुदरत-ए-फ़िक्रऔरअंदाज़-ए-सुख़नक्याकहना
आख़िरशसहलहुआनफ़-ओ-ज़ररकामतलब
अबहरइकचीज़पेचस्पाँहैसमनक्याकहना
ज़ीस्तइकपलहैफ़क़तदेखिएक्याकीजिएक्या
औरइसपलमेंभीसदरंज-ओ-मेहनक्याकहना
इसक़दरख़ौफ़मेंहूँमैंकिननींदआवेहै
किसक़दरख़्वाबमेंहैंअहल-ए-वतनक्याकहना