hamaare paas hai hikmat na raaz kya kijeye | हमारे पास है हिकमत न राज़ क्या कीजे

  - Akhtar Saeed
हमारेपासहैहिकमतराज़क्याकीजे
सिवाएदर्द-ए-दिल-ए-जाँ-गुदाज़क्याकीजे
इनायतेंहैंअगरचेहज़ार-हालेकिन
बनेबाततोबंदा-नवाज़क्याकीजे
ज़र्ब-ओ-तारसेरिश्तादिल-फ़रेबी-ए-दम
मिरेख़यालकोआलमहैसाज़क्याकीजे
ज़े-रू-ए-फ़िक़्हजोसबसेज़ियादाहैमा'तूब
हमारीउससेभीहैसाज़-बाज़क्याकीजे
जोजानतेहैंनहींजानतेजानेहैं
जोहैअयाँयहाँवोभीहैराज़क्याकीजे
जहाँगुज़ारिश-ए-अहवालपरहोंताज़ीरें
सिवाएजुरअत-ए-अर्ज़-ए-नियाज़क्याकीजे
खुलाइकउम्रकीकोशिशसेयेकिलिक्खाहै
हमारेनामनशेब-ओ-फ़राज़क्याकीजे
बुराहोलज़्ज़त-ए-तख़ईलकाकिरहतीहै
हक़ीक़तोंमेंतलाश-ए-मजाज़क्याकीजे
हज़ारदर्दहैऔरजान-ए-ना-तवाँमेरी
इलाजहैगलेकाजवाज़क्याकीजे
  - Akhtar Saeed
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