dil o nigaah pe taari rahe fusoon us ka | दिल ओ निगाह पे तारी रहे फ़ुसूँ उस का

  - Akhtar Razaa Saleemi
दिलनिगाहपेतारीरहेफ़ुसूँउसका
तुम्हाराहोकेभीमुमकिनहैमैंरहूँउसका
ज़मींकीख़ाकतोकबकीउड़ाचुकेहैंहम
हमारीज़दमेंहैअबचर्ख़-ए-नील-गूँउसका
तुझेख़बरनहींइसबातकीअभीशायद
कितेराहोतोगयाहूँमगरमैंहूँउसका
अबउससेक़त-ए-तअल्लुक़मेंबेहतरीहैमिरी
मैंअपनारहनहींसकताअगररहूँउसका
दिल-ए-तबाहकीधड़कनबतारहीहै'रज़ा'
यहींकहींपेहैवोशहर-पुर-सुकूँउसका
  - Akhtar Razaa Saleemi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy