kahaan jaayen chhod ke ham use koi aur us ke siva bhi hai | कहाँ जाएँ छोड़ के हम उसे कोई और उस के सिवा भी है

  - Akhtar Muslimi
कहाँजाएँछोड़केहमउसेकोईऔरउसकेसिवाभीहै
वहीदर्द-ए-दिलभीहैदोस्तोवहीदर्द-ए-दिलकीदवाभीहै
मिरीकश्तीलाखभँवरमेंहैकरूँँगामैंतिरीमिन्नतें
येपतानहींतुझेनाख़ुदामिरेसाथमेराख़ुदाभीहै
येअदाभीउसकीअजीबहैकिबढ़ाकेहौसला-ए-नज़र
मुझेइज़्न-ए-दीददियाभीहैमिरेदेखनेपेख़फ़ाभीहै
मिरीसम्तमहफ़िल-ए-ग़ैरमेंवोअदा-ए-नाज़सेदेखना
जोख़ता-ए-इश्क़कीहैसज़ातोमिरीवफ़ाकासिलाभीहै
जोहुजूम-ए-ग़मसेहैआँखनमतोलबोंपेनालेहैंदम-ब-दम
उसेकिसतरहसेछुपाएँहमकहींराज़-ए-इश्क़छुपाभीहै
येबजाकि'अख़्तर'-ए-मुस्लिमीहैज़मानेभरसेबुरामगर
उसेदेखिएजोख़ुलूससेतोभलोंमेंएकभलाभीहै
  - Akhtar Muslimi
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