dil hi rah-e-talab men na khona pada mujhe | दिल ही रह-ए-तलब में न खोना पड़ा मुझे

  - Akhtar Muslimi
दिलहीरह-ए-तलबमेंखोनापड़ामुझे
हाथअपनीज़िंदगीसेभीधोनापड़ामुझे
इकदिनमेंहँसपड़ाथाकिसीकेख़यालमें
ता-उम्रइतनीबातपेरोनापड़ामुझे
इकबारउनकोपानेकीदिलमेंथीआरज़ू
सौबारअपनेआपकोखोनापड़ामुझे
बर्बादहोगयाहूँमगरमुतमइनहैदिल
शर्मिंदा-ए-करमतोहोनापड़ामुझे
देखीगईमुझसेजोतूफ़ाँकीबेबसी
कश्तीकोअपनीआपडुबोनापड़ामुझे
जल्वेकहाँकिसीकेबिसात-ए-नज़रकहाँ
ज़र्रेमेंआफ़्ताबसमोनापड़ामुझे
'अख़्तर'जुनून-ए-इश्क़केमारोंकोदेखकर
अहल-ए-ख़िरदहँसेहैंतोरोनापड़ामुझे
  - Akhtar Muslimi
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