yuñ jo khulta hai zamaane ka bharam achha hai | यूँँ जो खुलता है ज़माने का भरम अच्छा है

  - Akhtar Madhupuri
यूँँजोखुलताहैज़मानेकाभरमअच्छाहै
हमपेहोतेहैंज़मानेकेसितमअच्छाहै
वोक़दमक्याजोतजस्सुसमेंरहेमंज़िलके
बढ़केख़ुदचूमलेमंज़िलवोक़दमअच्छाहै
हैतमन्ना-ए-असीरीतोकभीइसमेंउलझ
गेसू-ए-वक़्तकापेचअच्छाहैख़मअच्छाहै
अम्न-ओ-इंसाफ़-ओ-मुसावातकीख़ातिरलोगों
तुमउठाओजोबग़ावतकाअलमअच्छाहै
क़तरेमिलतेहैंतोवोहोतेहैंदरियामेंशुमार
हममिलाकरजोचलेंअपनेक़दमअच्छाहै
शीशा-ए-दिलमेंतोहैदोस्तकेइरफ़ाँकीशराब
शीशा-ए-दिलसेकहाँसाग़र-ओ-जमअच्छाहै
मिलकेकुछकरनेकाअबआयाहैवक़्तयारो
जिसक़दरहममेंरहेफ़ासलाकमअच्छाहै
'अख़्तर'करचमन-ए-गंग-ओ-जमनकोदेखे
जोयेकहताहैकिगुलज़ार-ए-इरमअच्छाहै
  - Akhtar Madhupuri
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