shahar ka shahar jala aur ujaala na hua | शहर का शहर जला और उजाला न हुआ

  - Akhtar Madhupuri
शहरकाशहरजलाऔरउजालाहुआ
सानेहाक्यायेमुक़द्दरकानिरालाहुआ
हैफ़क़तनामकोआज़ादी-ए-इज़हार-ए-ख़याल
वर्नाकबकिसकेलबोंपरयहाँतालाहुआ
टूटतेशीशेकोदेखाहैज़मानेभरने
दिलकेटुकड़ोंकाकोईदेखनेवालाहुआ
जिसनेपरखाउन्हेंवोथीकोईबे-जानमशीन
दिलकेज़ख़्मोंकाबशरदेखनेवालाहुआ
किसक़दरयास-ज़दाहैयेहिसार-ए-ज़ुल्मत
दिलजलाएभीतोहरसम्तउजालाहुआ
दश्त-ए-ग़ुर्बतकेसफ़रकीयेअज़िय्यत-नाकी
ख़ुश्कतलवोंकाअभीएकभीछालाहुआ
ज़ब्तकाहदसेगुज़रजानायहीहै'अख़्तर'
दिलसुलगताहैमगरहोंटोंपेनालाहुआ
  - Akhtar Madhupuri
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