shikwa-e-kasrat-e-bedaad karoon ya na karoon | शिकवा-ए-कसरत-ए-बेदाद करूँँ या न करूँँ

  - Akhtar Madhupuri
शिकवा-ए-कसरत-ए-बेदादकरूँँयाकरूँँ
ख़ातिर-ए-हुस्नकोनाशादकरूँँयाकरूँँ
दिल-ए-बर्बादकोआबादकरूँँयाकरूँँ
सोचताहूँकितुझेयादकरूँँयाकरूँँ
आसमाँमुझसेहिरासाँहीरहाकरताहै
ख़्वाहमैंनाला-ओ-फ़रियादकरूँँयाकरूँँ
ख़ुदभीसय्यादपरेशाँहैमुझेकरकेअसीर
सोचताहैइसेआज़ादकरूँँयाकरूँँ
जौर-ए-गुलचींहैकिबढ़ताहीचलाजाताहै
जौर-ए-गुलचींपेमैंफ़रियादकरूँँयाकरूँँ
मौसम-ए-गुलकीहसींशामहैमय-ख़ाना-ब-दोश
साक़ीऐसेमेंतुझेयादकरूँँयाकरूँँ
ज़िंदगीकैफ़-ब-दामाँथीमिरीजब'अख़्तर'
अबवोबीतेहुएदिनयादकरूँँयाकरूँँ
  - Akhtar Madhupuri
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