jahaan-e-be-sabaati men tamasha-e-jahaan kab tak | जहान-ए-बे-सबाती में तमाशा-ए-जहाँ कब तक

  - Akhtar Madhupuri
जहान-ए-बे-सबातीमेंतमाशा-ए-जहाँकबतक
चमकतेमेहर-ओ-महतारेज़मीन-ओ-आसमाँकबतक
शब-ए-ग़ममेंतजल्लीपरइतरादिल-ए-मुज़्तर
सितारोंकीयेचश्मकऔररक़्स-ए-कहकशाँकबतक
समुंदरकीख़मोशीएकतूफ़ाँसाथलाएगी
किसीना-मेहरबाँकीयेनिगाह-ए-मेहरबाँकबतक
बढ़ाएजाक़दमतूबढ़केसरगर्म-ए-अमलहोजा
यूँँहीतकतारहेगासू-ए-गर्द-ए-कारवाँकबतक
लगाकरआगख़ुदहीक्यूँबद-बख़्तीपेमैंरोलूँ
जलाएँआशियाँकोमेरेआख़िरबिजलियाँकबतक
येबेहतरहैफ़लकहोनाहैजोकुछअबवोहोजाए
रहूँतेरीबला-ए-ना-गहाँकेदरमियाँकबतक
कमाल-ए-ज़ब्तपरभीअश्क-ए-ग़मआँखोंसेबहनिकले
भलारोकेसेरुकसकतीथीयेसैल-ए-रवाँकबतक
फ़ज़ा-ए-ज़ीस्तपरतारीहै'अख़्तर'यासकाआलम
जानेमतला-ए-उम्मीदहोगाज़रफ़िशाँकबतक
  - Akhtar Madhupuri
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