dil ke har zakham ko palkon pe sajaaya to gaya | दिल के हर ज़ख़्म को पलकों पे सजाया तो गया

  - Akhtar lakhnvi
दिलकेहरज़ख़्मकोपलकोंपेसजायातोगया
आपकेनामपेइकजश्नमनायातोगया
मय-ए-कोहनासहीख़ून-ए-तमन्नाहीसही
एकपैमानामिरेसामनेलायातोगया
ख़ैरअपनानहींबाग़ीहीसमझकरहमको
तेरीमहफ़िलमेंकिसीतौरबुलायातोगया
अबयेबातऔरकिज़िंदाँमेंभीज़ंजीरेंहैं
हमकोगुलशनकीबलाओंसेबचायातोगया
दारपेचढ़केभीख़ुशहैंकिहमेंइसदिलमें
इसबहानेहीसहीअपनाबनायातोगया
अबयेक़िस्मतहीजागेतोकरेक्याकोई
रोज़-ओ-शबइकनयातूफ़ानउठायातोगया
क्याहैमंज़िलसेअगरहोगएहमदूर'अख़्तर'
रहबरोंकेहमेंहल्क़ेसेनिकालातोगया
  - Akhtar lakhnvi
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