ab dard ka suraj kabhi dhalt hi nahin hai | अब दर्द का सूरज कभी ढलता ही नहीं है

  - Akhtar lakhnvi
अबदर्दकासूरजकभीढलताहीनहींहै
अबदिलकोईपहलूहोसँभलताहीनहींहै
बेचैनकिएरहतीहैजिसकीतलब-ए-दीद
अबबामपेवोचाँदनिकलताहीनहींहै
इकउम्रसेदुनियाकाहैबसएकहीआलम
येक्याकिफ़लकरंगबदलताहीनहींहै
नाकामरहाउनकीनिगाहोंकाफ़ुसूँभी
इसवक़्ततोजादूकोईचलताहीनहींहै
जज़्बेकीकड़ीधूपहोतोक्यानहींमुमकिन
येकिसनेकहासंगपिघलताहीनहींहै
  - Akhtar lakhnvi
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