hoshyaar kar raha hai gajr jaagte raho | होश्यार कर रहा है गजर जागते रहो

  - Akhtar lakhnvi
होश्यारकररहाहैगजरजागतेरहो
साहिबान-ए-फ़िक्र-ओ-नज़रजागतेरहो
दश्त-ए-शब-ए-सियाहमेंसुनतेहैंशब-परस्त
रोकेंगेकारवान-ए-सहरजागतेरहो
ज़ुल्मतकहींकरदेउजालेकोदाग़-दार
लेकरचराग़-ए-दीदा-ए-तरजागतेरहो
सोएनहींकिडूबगईनब्ज़-ए-काएनात
बोझलहोलाखआँखमगरजागतेरहो
ख़्वाबीदाअपनेचाहनेवालोंकोदेखकर
मुमकिनहैलौटजाएसहरजागतेरहो
  - Akhtar lakhnvi
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