soo-e-maqtal koi dam saath chale | सू-ए-मक़्तल कोई दम साथ चले

  - Akhtar lakhnvi
सू-ए-मक़्तलकोईदमसाथचले
जिसकोरखनाहोभरमसाथचले
इसीहसरतमेंकटीराह-ए-हयात
कोईदो-चारक़दमसाथचले
ख़ार-ज़ारोंमेंजहाँकोईथा
बनकेहम-दमतिरेग़मसाथचले
हमसेरिंदोंकाठिकानाक्याहै
तुमकहाँशैख़-ए-हरमसाथचले
वादी-ए-शबकीकठिनराहोंमें
लोगकतरागएकमसाथचले
  - Akhtar lakhnvi
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