jo sang ho ke mulaayem hai saadgi ki tarah | जो संग हो के मुलाएम है सादगी की तरह

  - Akhtar Imam Rizvi
जोसंगहोकेमुलाएमहैसादगीकीतरह
पिघलरहाहैमिरेदिलमेंचाँदनीकीतरह
मुझेपुकारोतोदीवारहूँसुनोतोसदा
मैंगूँजताहूँफ़ज़ाओंमेंख़ामुशीकीतरह
मैंउसकोनूरकापैकरकहूँकिजान-ए-ख़याल
जोमेरेदिलपेउतरताहैशा'इरीकीतरह
किसीकीयादनेमहकादियाहैज़ख़्म-ए-तलब
सबाकेहाथसेमसलीहुईकलीकीतरह
थकाहुआहूँकिसीसाएकीतलाशमेंहूँ
बिछड़गयाहूँसितारोंसेरौशनीकीतरह
मैंअपनेकर्बमेंग़लताँवोअपनेकैफ़मेंगुम
हैइसकीजीतभीमेरीशिकस्तहीकीतरह
ख़िज़ाँकेज़हरकातिरयाकअगरनहींयारो
गुलोंकीबातहैबे-वक़्तरागनीकीतरह
  - Akhtar Imam Rizvi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy