kise khabar jab main shahr-e-jaan se guzar raha tha | किसे ख़बर जब मैं शहर-ए-जाँ से गुज़र रहा था

  - Akhtar Hoshiyarpuri
किसेख़बरजबमैंशहर-ए-जाँसेगुज़ररहाथा
ज़मींथीपहलूमेंसूरजइककोसपररहाथा
हवामेंख़ुशबुएँमेरीपहचानबनगईथीं
मैंअपनीमिट्टीसेफूलबनकरउभररहाथा
अजीबसरगोशियोंकाआलमथाअंजुमनमें
मैंसुनरहाथाज़मानातन्क़ीदकररहाथा
वोकैसीछतथीजोमुझकोआवाज़देरहीथी
वोक्यानगरथाजहाँमैंचुप-चापउतररहाथा
मैंदेखताथाकिउँगलियोंमेंदिएकीलौहै
मैंजागताथाकिरंगख़्वाबोंमेंभररहाथा
येबातअलगहैकिमैंनेझाँकानहींगलीमें
येसचहैकोईसदाएँदेतागुज़ररहाथा
येचंदबे-हर्फ़-ओ-सौतख़ाकेमिराअसासा
मैंजिनकोग़ज़लोंकानामदेकरसँवररहाथा
ज़मानाशबनमकेभेसमेंआयाऔरदु'आदी
मैंज़र्द-रुतमेंजबअपनीबाहोँमेंमररहाथा
मुझेकिसीसेनक़ब-ज़नीकाख़तरनहींथा
मुझे'अख़्तर'अपनेहीजस्द-ए-ख़ाकीसेडररहाथा
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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