ghar ko bhi ghar kar na paa.e aur na veeraani mili | घर को भी घर कर न पाए और न वीरानी मिली

  - Akhilesh Tiwari
घरकोभीघरकरपाएऔरवीरानीमिली
बसयहीमुश्किलथीअपनीसिर्फ़आसानीमिली
मुंतज़िरकितनेख़ुदाथेहरतरफ़अबक्याकहें
जबकेसज्दोंकेलिएबसएकपेशानीमिली
इसगलीसेआजमुद्दतबादजानाफिरहुआ
आजभीहैरतसेतकतीहमकोहैरानीमिली
अजनबीइसभीड़मेंतन्हाईभीआईनज़र
दिलकोकुछतस्कींहुईइकशक्लपहचानीमिली
आँसुओंसेरातजोनमहोगयाथाबे-तरह
आपकेइसख़्वाबकोक्याफिरसेताबानीमिली
  - Akhilesh Tiwari
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