mulaahiza ho mirii bhi udaan pinjare men | मुलाहिज़ा हो मिरी भी उड़ान पिंजरे में

  - Akhilesh Tiwari
मुलाहिज़ाहोमिरीभीउड़ानपिंजरेमें
अताहुएहैंमुझेदो-जहानपिंजरेमें
हैसैर-गाहभीऔरइसमेंआब-ओ-दानाभी
रखागयाहैमिराकितनाध्यानपिंजरेमें
इसएकशर्तपरउसनेरिहाकियामुझको
रखेगारेहनवोमेरीउड़ानपिंजरेमें
यहींहलाकहुआहैपरिंदाख़्वाहिशका
तभीतोहैंयेलहूकेनिशानपिंजरेमें
मुझेसताएगातन्हाइयोंकामौसमक्या
हैमेरेसाथमिराख़ानदानपिंजरेमें
फ़लकपेजबभीपरिंदोंकीसफ़नज़रआई
हुईहैंकितनीहीयादेंजवानपिंजरेमें
ख़यालआयाहमेंभीख़ुदाकीरहमतका
सुनाईजबभीपड़ीहैअज़ानपिंजरेमें
तरहतरहकेसबक़इसलिएरटाएगए
मैंभूलजाऊँखुलाआसमानपिंजरेमें
  - Akhilesh Tiwari
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