kab tak ghut kar jeete rahte sachchaai ke maare KHvaab | कब तक घुट कर जीते रहते सच्चाई के मारे ख़्वाब

  - Akhilesh Tiwari
कबतकघुटकरजीतेरहतेसच्चाईकेमारेख़्वाब
पलकोंकीदहलीज़सेबाहरनिकलेफिरबंजारेख़्वाब
फ़ितरतसेहीआवाराहैंकबठहरेजोठहरेंगे
कैसेपलकोंपरअटकेहैंकुछख़ुश-रंगतुम्हारेख़्वाब
अबमौलाहीजानेइनमेंअपनाकौनपरायाकौन
हँसहँसकरहरशबमिलतेहैंयूँँतोइतनेसारेख़्वाब
जीवनकीइसआपा-धापीमेंजोपीछेछूटगए
जानेअबकिसहालमेंहोंगेवोक़िस्मतकेमारेख़्वाब
ताबीरोंकीफ़स्लेंकैसीउगतीहैंकलदेखेंगे
हमनेभीबोएहैंशबभररंग-बिरंगेप्यारेख़्वाब
कब'अखिलेश'तवक़्क़ोकीथीबर्फ़ीलीइसघाटीसे
आँखोंसेबरसेंगेउसकीबनकरयूँँअंगारेख़्वाब
  - Akhilesh Tiwari
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