fareb khaana nahin baar baar cheekhta hai | फ़रेब खाना नहीं बार बार चीख़ता है

  - Akhilesh Tiwari
फ़रेबखानानहींबारबारचीख़ताहै
नदीकीतहसेकोईरेगज़ारचीख़ताहै
बदनकेग़ारसेबे-इख़्तियारचीख़ताहै
शिकारहोनेसेपहलेशिकारचीख़ताहै
तमामदिनतोनहींटूटतातिलिस्म-एसदा
तमामरातभीबसइंतिज़ारचीख़ताहै
उधरजानाउधररास्तेमेंमंज़िलहै
सफ़रकालुत्फ़सर-ए-रहगुज़ारचीख़ताहै
महाज़-ए-जंगमेंपहलेहरीफ़तयतोहों
लगामथा
मेंहुएशहसवारचीख़ताहै
तमामउम्रकाहासिलहैसिर्फ़तन्हाई
बुलंदियोंसेकोईकोहसारचीख़ताहै
इसीलिएतोमैंख़ुदसेहीभागाफिरताहूँ
कोईहैमुझमेंनसीहत-गुज़ारचीख़ताहै
  - Akhilesh Tiwari
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