na dhoop dhoop rahe aur na saaya saaya to | न धूप धूप रहे और न साया साया तो

  - Akhilesh Tiwari
धूपधूपरहेऔरसायासायातो
जुनून-ए-शौक़अगरफिरवहींपेलायातो
क़दमबढ़ातोलूँआबादियोंकीसम्तमगर
मुझेवोढूँढतातन्हाइयोंमेंआयातो
सुलूकख़ुदसेहरीफ़ानाकौनचाहेगा
अगरचेतूनेमुझेज़िंदगीनिभायातो
मैंजिसकीओटमेंमौसमकीमारसहताहूँ
कहींखंडरभीवोबारिशनेअबकेढायातो
मगरगईमहकमुझसेमेरेमाज़ीकी
नदीकीधारमेंसौबारमैंनहाएातो
शरीफ़लोगथेआदीथेबंदकमरोंके
लरज़उठेकिसीनेक़हक़हालगायातो
हैरस्म-ओ-राहकीसूरतअभीग़नीमतहै
नदीनेदेखमुझेहाथफिरहिलायातो
  - Akhilesh Tiwari
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