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''Akbar Rizvi"
zinda rahne ke li.e aaj bhi aadam ki zami
zinda rahne ke li.e aaj bhi aadam ki zami | ज़िन्दा रहने के लिए आज भी आदम की ज़मी
- ''Akbar Rizvi"
ज़िन्दा
रहने
के
लिए
आज
भी
आदम
की
ज़मी
सिर्फ़
हैदर
के
ग़ुलामों
का
लहू
मांगती
है
- ''Akbar Rizvi"
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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कोई
हादसा
लेकर
आदमी
किधर
जाए
आदमी
अगर
कह
दे
हादसा
उदासी
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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बस
एक
मैं
था
जिस
सेे
सच
मुच
में
दिलबरी
की
वरना
हर
आदमी
से
उसने
दो
नंबरी
की
जिस
बात
में
भी
हमने
ख़ुद
को
अकेला
रक्खा
बाग़ात
में
भी
हमने
जोड़ों
की
मुख़बरी
की
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Muzdum Khan
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इक
आदमी
जो
घर
पे
कभी
हँसता
ही
नहीं
पकड़ा
गया
है
हँसता
हुआ
कैमरे
के
साथ
Shadab khan
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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तबक़ों
में
रंग-ओ-नस्ल
के
उलझा
के
रख
दिया
ये
ज़ुल्म
आदमी
ने
किया
आदमी
के
साथ
Bakhtiyar Ziya
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बस्ती
में
अपनी
हिन्दू
मुसलमाँ
जो
बस
गए
इंसाँ
की
शक्ल
देखने
को
हम
तरस
गए
Kaifi Azmi
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मिरे
किरदार
जाने
दे
नज़रअंदाज
कर
दे
ख़ुदा
की
फ़िल्म
है
ये
आदमी
से
क्या
शिकायत
Vikram Sharma
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आदमी
देश
छोड़े
तो
छोड़े
'अली'
दिल
में
बसता
हुआ
घर
नहीं
छोड़ता
एक
मैं
हूँ
कि
नींदें
नहीं
आ
रही
एक
तू
है
कि
बिस्तर
नहीं
छोड़ता
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Ali Zaryoun
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गर
जो
दुश्मन
भी
पिलाए
तो
पिएँगे
हँसकर
चाय
का
हम
सेे
तो
इनकार
नहीं
होता
है
''Akbar Rizvi"
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देर
तक
कोई
भी
एहल-ए-ज़ुल्म
यूँँ
टिकता
नहीं
चार
सू
फैली
हुई
है
कर्बला
की
रौशनी
''Akbar Rizvi"
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नुसरत-ए-हक़
देखना
आशूर
तक
ले
जाएगी
हसरत-ए-दीदार
कोह-ए-तूर
तक
ले
जाएगी
''Akbar Rizvi"
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जिस
सेे
डरते
थे
ज़माने
के
सितमगर
सारे
आज
के
दौर
का
वो
मालिक-ए-अश्तर
न
रहा
''Akbar Rizvi"
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बाद
में
बिखरे
अगर
और
भी
होगा
अफ़सोस
मैं
न
बच्चों
को
नये
ख़्वाब
सजाने
दूँगा
''Akbar Rizvi"
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