gham-e-wafaa ko pas-e-pusht daalna hogaa | ग़म-ए-वफ़ा को पस-ए-पुश्त डालना होगा

  - Aijaz Asad
ग़म-ए-वफ़ाकोपस-ए-पुश्तडालनाहोगा
खटकरहाहैजोकाँटानिकालनाहोगा
फ़क़ीर-ए-इश्क़हूँकुछदेकेटालनाहोगा
बसइकनिगाहकासिक्काउछालनाहोगा
सवालदोस्तोअज़्मतकाहैसरोंकानहीं
हमेंवक़ारकापरचमसँभालनाहोगा
ग़ज़बकीप्यासलगीसामनासराबकाहै
सोरेग-ए-सहरासेपानीनिकालनाहोगा
उसेबताओकिफ़ाक़ाहैआजअपनाभी
मगरफ़क़ीरकोइज़्ज़तसेटालनाहोगा
येइंतिज़ारसलामतरहेवोआएगा
मगरहैशर्तकिदिलकोसँभालनाहोगा
तुम्हारेदिलकीज़मींजलचुकीमगर'एजाज़'
इसीसेनख़्ल-ए-मोहब्बतनिकालनाहोगा
  - Aijaz Asad
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