ग़म-ए-वफ़ाकोपस-ए-पुश्तडालनाहोगा
खटकरहाहैजोकाँटानिकालनाहोगा
फ़क़ीर-ए-इश्क़हूँकुछदेकेटालनाहोगा
बसइकनिगाहकासिक्काउछालनाहोगा
सवालदोस्तोअज़्मतकाहैसरोंकानहीं
हमेंवक़ारकापरचमसँभालनाहोगा
ग़ज़बकीप्यासलगीसामनासराबकाहै
सोरेग-ए-सहरासेपानीनिकालनाहोगा
उसेबताओकिफ़ाक़ाहैआजअपनाभी
मगरफ़क़ीरकोइज़्ज़तसेटालनाहोगा
येइंतिज़ारसलामतरहेवोआएगा
मगरहैशर्तकिदिलकोसँभालनाहोगा
तुम्हारेदिलकीज़मींजलचुकीमगर'एजाज़'
इसीसेनख़्ल-ए-मोहब्बतनिकालनाहोगा