zaraa sharaab laake de do mire KHoon ke li.e | ज़रा शराब लाके दे दो मेरे ख़ून के लिए

  - Faiz Ahmad
ज़राशराबलाकेदेदोमेरेख़ूनकेलिए
किआगचाहिएमुझेमिरेजुनूनकेलिए
हैहालअबवोमुफ़लिसीकामेरेघरकेआजकल
मैंख़ूनकररहाहूँख़ुदकाख़ुदकेख़ूनकेलिए
मिलेगावोहीजोलिखाहैमांगोनामांगोतुम
दु'आतोहैतुम्हारेदिलकेबससुकूनकेलिए
जहानकीसभीख़ुशियोंकोइख्ट्टाकरकेफिर
केक़ैदकरलियाहैमैंनेमाह-ए-जूनकेलिए
हाक़िम-ए-शहरहैरानमतहोयेबतामुझे
दवाहैतेरेपासमुझजिसेज़ुबूनकेलिए
नहींहैवोकिसीभीमुक़ाबिल-ए-मकामको
जुनून-ए-इश्कजिसकोकमरहाजुनूनकेलिए
तिरावोजोड़ातेरेहोनेकाभरमदिलाताहै
वोजोमैंलायाथातिरेमिरेशुगूनकेलिए
गुजरतीहैयूँँरोज़ज़िन्दगीबेचैनियोंमेंकि
सुकूनसेमैंसोचूंगाकभीसुकूनकेलिए
तुमउसकेहाल-ए-दिलपेग़ौरठीकसेदियाकरो
केफ़ैज़दर्दकोबड़ाताहैसुकूनकेलिए
  - Faiz Ahmad
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy