jamaato men namaazo men kabhi nahin milega | जमातो में नमाजो़ में कभी नहीं मिलेगा

  - Faiz Ahmad
जमातोमेंनमाजो़मेंकभीनहींमिलेगा
मिलेगाफ़ैज़मय-कदेमेंगरकहींमिलेगा
तूढूंँढ़नाअगरजोचाहेतोतलाशकरले
मगरमुझऐसाबादाकशकहींनहींमिलेगा
फरिश्तोंनेभीमेरीक़ब्रकोकुछऐसेढूंँढा
इधरअज़ाबसख़्तहैसोवोयहींमिलेगा
लिपटरहेहैंसाक़ीसेयेजानतेहुएभी
कितेराकुर्बसासुकूंँइधरनहींमिलेगा
मैंमांँगनेलगातुझेजोफूटकेदु'आमें
कहाख़ुदानेख़ूबरोलेपरनहींमिलेगा
  - Faiz Ahmad
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