kartoot-e-na-gawar tufail aasmaan se | करतूत-ए-ना-गवार तुफै़ल आसमान से

  - Faiz Ahmad
करतूत-ए-ना-गवारतुफै़लआसमानसे
फैंकाहूँइसजहानमेंमैंइकजहानसे
उसनेकहाथातीसराकोईआएगा
पसइसलिएनिकालामुझेदास्तानसे
येराह-ए-इश्क़हैकियहाँबेख़ुदीमेंचल
गिरजाएगाभटककेचलेगाजोध्यानसे
आसेबबनकेबैठीहैदिलमेंतुम्हारीयाद
क्यावास्ताहैइसकाजानेमकानसे
शहर-ए-ना-सिपासमुझेगै़रमतसमझ
तूनेपनाहलीहैमिरेआस्तानसे
उसकेफ़िराक़नेमुझेशाइरबनादिया
इकफै़ज़मिलरहाहैमुझेइसज़ियानसे
अटकाहैमिसराज़ेहनमेंबसइकख़यालपर
इकलफ़्ज़नहींरहाशहर-ए-गुमानसे
हमऐसेबदनसीबकिहमकोअतानहीं
मिलजाएबद-दुआकभीउसख़ुश-ज़बानसे
उसनेअदील-ए-शहरकोबहकायाहुस्नसे
बा-उज़्रहोकेहारगएउसहिसानसे
अबफ़िक्रहैविसालकीअहमदख़ौफ़-ए-हिज्र
मय-ख़ानेमेंहैंपीरहेहैंइत्मीनानसे
  - Faiz Ahmad
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