देख लो फिर से कुछ रहा तो नहीं ?

  - Faiz Ahmad
देखलोफिरसेकुछरहातोनहीं?
तुममेंअंदरमैंऔरबचातोनहीं?
मेरेज़िंदानमेंबसेहुएशख़्स
मुझकोबतलाकिमैंबुरातोनहीं?
अपनीक़ामतसेऊँचाहैशब्बीर
गिरगयाकटकेपरझुकातोनहीं?
सोचताहूँकिदहर-ए-फ़ानीमें
तेरीफ़ुर्क़तमिरीसज़ातोनहीं?
  - Faiz Ahmad
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