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Faiz Ahmad
fareb-e-husn se dil-e-gudaz ko bigaad kar
fareb-e-husn se dil-e-gudaz ko bigaad kar | फ़रेब-ए-हुस्न से दिल-ए-गु़दाज़ को बिगाड़ कर
- Faiz Ahmad
फ़रेब-ए-हुस्न
से
दिल-ए-गु़दाज़
को
बिगाड़
कर
कहाँ
चली
गई
हो
मेरी
ज़िंदगी
उजाड़
कर
- Faiz Ahmad
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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ये
ज़मीं
किस
क़दर
सजाई
गई
ज़िंदगी
की
तड़प
बढ़ाई
गई
आईने
से
बिगड़
के
बैठ
गए
जिन
की
सूरत
जिन्हें
दिखाई
गई
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Sahir Ludhianvi
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इस
ज़िन्दगी
में
इतनी
फ़राग़त
किसे
नसीब
इतना
न
याद
आ
कि
तुझे
भूल
जाएँ
हम
Ahmad Faraz
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तेरा
प्यार
मेरी
ज़िंदगी
में
बहार
ले
कर
आया
है
तेरे
आने
से
पहले
हर
दिन
पतझड़
हुआ
करता
था
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Vipul Kumar
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है
सहज
स्वीकार
जो
जीवन
पे
वो
अपवाद
तुम
ज़िंदगी
अवसाद
है
अवसाद
में
उन्माद
तुम
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Ahsan Marahravi
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मैं
तिरी
मोहब्बत
की
कभी
भी
बर्बादी
नहीं
करूँंँगा
मर
मिटूंँगा
लेकिन
और
किसी
से
मैं
शादी
नहीं
करूँंँगा
Faiz Ahmad
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ये
रोज़ें,
ये
नमाज़ें,
ये
दुआएँ
फ़क़त
इक
तुझको
पाने
के
लिए
हैं
Faiz Ahmad
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चल
रहा
था
मिरे
नक्श-ए-पा
पर
ये
दिल
इश्क़
की
फिर
गली
देखी
और
मुड़
गया
Faiz Ahmad
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रोज़
मेरे
घर
की
जिम्मेदारियाँ
मुझ
को
आ
कर
भूल
जाने
का
तुझे
अब
मशवरा
दे
रही
हैं
Faiz Ahmad
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तुम्हारे
ग़म
को
मगर
ओढ़े
रक्खा
तीनों
दिन
मैं
चाहता
तो
मना
सकता
था
तेरे
बिन
ईद
Faiz Ahmad
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