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Ahmad Razi Bachhrayuni
man ke bargad tale angaaron ki maala bhi japi
man ke bargad tale angaaron ki maala bhi japi | मन के बरगद तले अँगारों की माला भी जपी
- Ahmad Razi Bachhrayuni
मन
के
बरगद
तले
अँगारों
की
माला
भी
जपी
मुझ
से
गौतम
की
तरह
आग
में
चम्पा
न
खिली
रात
तन्हाई
ने
कमरे
में
जो
करवट
बदली
नींद
आँखों
को
किसी
साँप
के
फन
जैसी
लगी
मेरे
ही
साँस
से
मेरे
ही
बदन
की
चादर
कौन
समझाए
किसे
आए
यक़ीं
कैसे
जली
इस
भरे
शहर
में
अपनाया
किसी
ने
न
जिसे
मैं
ने
देखा
तो
'रज़ी'
लाश
वो
मेरी
निकली
- Ahmad Razi Bachhrayuni
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उस
के
ख़त
रात
भर
यूँँ
पढ़ता
हूँ
जैसे
कल
इम्तिहान
हो
मेरा
Zubair Ali Tabish
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मैं
सो
रहा
हूँ
तेरे
ख़्वाब
देखने
के
लिए
ये
आरज़ू
है
कि
आँखों
में
रात
रह
जाए
Shakeel Azmi
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इक
रात
वो
गया
था
जहाँ
बात
रोक
के
अब
तक
रुका
हुआ
हूँ
वहीं
रात
रोक
के
Farhat Ehsaas
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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दिन
में
मिल
लेते
कहीं
रात
ज़रूरी
थी
क्या?
बेनतीजा
ये
मुलाक़ात
ज़रूरी
थी
क्या
मुझ
सेे
कहते
तो
मैं
आँखों
में
बुला
लेता
तुम्हें
भीगने
के
लिए
बरसात
ज़रूरी
थी
क्या
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Abrar Kashif
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तेरे
बिन
घड़ियाँ
गिनी
हैं
रात
दिन
नौ
बरस
ग्यारह
महीने
सात
दिन
Rehman Faris
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सारी
रात
लगाकर
उसपर
नज़्म
लिखी
और
उसने
बस
अच्छा
लिखकर
भेजा
है
Zahid Bashir
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वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
AMAN RAJ SINHA
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लगती
हैं
गाली
बिल्डिंगें
सारी
ख़याली
बिल्डिंगें
तुम
भी
न
ठहरोगे
यहाँ
कहती
हैं
ख़ाली
बिल्डिंगें
मेरा
पता
आसेब-ए-जाँ
जिन
भूत
वाली
बिल्डिंगें
सड़कों
पे
सो
जाता
हूँ
मैं
मनहूस
काली
बिल्डिंगें
चलती
हवा
के
सामने
ठहरें
मिसाली
बिल्डिंगें
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Ahmad Razi Bachhrayuni
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ख़ून
की
हर
बूँद
पत्थर
हो
चुकी
ज़िंदगी
ख़तरे
से
बाहर
हो
चुकी
आँधियों
की
ज़द
पे
ऐ
रेग-ए-रवाँ
बे-घरी
तेरा
मुक़द्दर
हो
चुकी
मैं
निकल
आया
हिसार-ए-जिस्म
से
सर्द
जब
शो'लों
की
चादर
हो
चुकी
एहतियातों
से
भी
कुछ
हासिल
नहीं
अब
तो
ये
मिट्टी
भी
बंजर
हो
चुकी
साया-ए-अक्स-ए-नवा
भी
मिट
गया
धूप
भी
मुट्ठी
बराबर
हो
चुकी
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Ahmad Razi Bachhrayuni
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