man ke bargad tale angaaron ki maala bhi japi | मन के बरगद तले अँगारों की माला भी जपी

  - Ahmad Razi Bachhrayuni
मनकेबरगदतलेअँगारोंकीमालाभीजपी
मुझसेगौतमकीतरहआगमेंचम्पाखिली
राततन्हाईनेकमरेमेंजोकरवटबदली
नींदआँखोंकोकिसीसाँपकेफनजैसीलगी
मेरेहीसाँससेमेरेहीबदनकीचादर
कौनसमझाएकिसेआएयक़ींकैसेजली
इसभरेशहरमेंअपनायाकिसीनेजिसे
मैंनेदेखातो'रज़ी'लाशवोमेरीनिकली
  - Ahmad Razi Bachhrayuni
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