qad o gesu lab-o-rukhsaar ke afsaane chale | क़द ओ गेसू लब-ओ-रुख़्सार के अफ़्साने चले

  - Ahmad Rahi
क़दगेसूलब-ओ-रुख़्सारकेअफ़्सानेचले
आजमहफ़िलमेंतिरेनामपेपैमानेचले
अभीतूनेदिल-ए-शोरीदाकोदेखाक्याहै
मौजमेंआएतोतूफ़ानोंसेटकरानेचले
देखेंअबरहताहैकिसकिसकागरेबाँसाबित
चाक-ए-दिललेकेतिरीबज़्मसेदीवानेचले
फिरकिसीजश्न-ए-चराग़ाँकागुमाँहैशायद
आजहरसम्तसेपुर-सोख़्तापरवानेचले
येमसीहाईभीइकतुर्फ़ा-तमाशाहैकिजब
दमउलटजाएतोवोज़ख़्मोंकोसहलानेचले
जिसनेउलझायाहैकितनेहीदिलोंकोयारो
हमभीउसज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीरकोसुलझानेचले
  - Ahmad Rahi
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